काठमाण्डू/ सिर्फ राजनीतिक दलों के कह देने भर से माओवादी के जनमुक्ति सेना का नेपाल की राष्ट्रीय सेना में समायोजन नहीं हो सकता है। यह बयान है नेपाली सेना के पूर्व प्रधान सेनापति रूकमांगद कटवाल का। कटवाल का यह बायान ऐसे समय आया है जब लगभग सभी राजनीतिक दल सेना समायोजन के लिए विचार-विमर्श कर रहे है। दलों मे सेना समायोजन संविधान जारी होने से पहले हो या बाद में हो इस बात पर विवाद बना हुआ है ।
लेकिन ऐसे ही समय नेपाली सेना के पूर्व प्रधान सेनापति कटवाल का यह बयान नेपाली राजनीति में बहस का नयां मुद्दा बना दिया है। कटवाल ने आज सुबह अपने निवास पर कुछ पत्रकारों को बुलाकर यह बयान दिया है। कटवाल ने साफ शब्दों में कहा है कि सेना समायोजन का मुद्दा देश की आन्तरिक व बाह्य सुरक्षा से जुडी है । इसलिए बिना सेना को विश्वास में लिए समायोजन की बात भी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने साफ शब्दों में बता दिया कि माओवादी के सेना का सामूहिक समायोजन तो दूर की बात है व्यक्तिगत समायोजन भी नही हो सकता है।
कटवाल ने इसका कारण बताते हुए कहा कि माओवादी के लडाकु एक वाद के भीतर रहकर प्रशिक्षण लिया है। उन्हें इस ढंग से प्रशिक्षित किया गया है कि वो हमेशा अपनी पार्टी के प्रति ही वफादार रहेंगे। जबकि नेपाली सेना नेपाली जनता के प्रति समर्पित संस्था है। इसलिए सेना समायोजन पर राजनीतिक दलों को विचर करना चाहिए। यदि जबर्दस्ती सेना समायोजन किया गया तो नेपाली सेना में विद्रोह होने से कोई नहीं रोक सकता है। कटवाल ने कहा कि मैं भी नेपाली सेना का प्रधान सेनापति रह चुका हूं। मैं इस बात को अच्छी तरह से जानता हूं कि नेपाली सेना का कोई भी जवान यह नहीं चाहता है कि विद्रोही पार्टी के सेना का समायोजन हमारी सेना में किया जाय।
कटवाल ने यह भी खुलासा किया कि यदि राजनीतिक दल जर्दस्ती सेना समायोजन ़इ बात नेपाली सेना पर लादने की कोशिश करेंगे तो सेना भी उसकी तैयारी के लिए बैठा हुआ है। कटवाल ने कहा कि उसकेबाद जो परिस्थिति होगी उसके लिए नेता ही जिम्मेवार होंगे। कटवाल ने खून खराबे होने तक की चेतावनी दे डाली। देश में राष्ट्रपति शासन या सैनिक शासन की बात पर उन्होंने कह कि हमारे संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नही है।
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